दास्तान-ए-ईश्क — Hindi poems

जुनून-ए-ईश्क इस कदर छाया है मुझ पर, प्यार ही प्यार नज़र आएं अब हर घड़ी तुझ पर। माना अभी फांसले बहुत है तेरे मेरे​ दरमियान, फिर भी तू नज़र आएं याद तुझे जब किया। संग तेरे अब मुझे अपना आशियाना सजाना है, हंसना गाना तेरे साथ है और घर बसाना है। ख्वाब सजा लिए है […]

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दास्तान-ए-इश्क

जुनून-ए-इश्क इस कदर छाया है मुझ पर,

प्यार ही प्यार नज़र आएं अब हर घड़ी तुझ पर।

माना अभी फांसले बहुत है तेरे मेरे दरमियान,

फिर भी तू नज़र आएं याद तुझे जब किया।

संग तेरे अब मुझे अपना आशियाना सजाना है,

हंसना गाना तेरे साथ है और घर बसाना है।

ख्वाब सजा लिए है कई तेरे साथ जीने मरने के,

वादे कर लिए है खुद से तुझे खुशियां देकर दुख हरने के।

ईश्क इतना करना है तुझसे कि पा कर भी और पाना है,

तेरे साथ जीते जीते मुझे तुझ पर ही मरते जाना है।

मेरी वजह से “मेरी जान” तेरी दुनिया में कभी न गम होगा,

जो हुआ तो समझ लेना मेरा वजूद इस ज़मीं से खत्म होगा।

©Sweta_dagur